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मेहनत सीढ़ियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती है पर सीढ़ियां हमेशा उंचाई की तरफ ले जाती हैं|

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम पीयूष त्रिपाठी है| मेरी सफलता का पूरा श्रेय मेरे पापा को जाता है|  मेरे पापा एक रिक्शा चालक हैं| उनको देखकर मुझे प्रेरणा मिलती है|  जब वह इतनी मेहनत करके पैसा कमाते हैं तो हम क्यों नहीं मेहनत कर सकते हैं|

दोस्तों में एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का हूं| और मैं एक छोटे से गांव में रहता हूं  मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इतनी कम उम्र में SSC की परीक्षा उत्तीर्ण कर लूंगा| मेरे पैरेंट्स बहुत ही मध्यम वर्गीय परिवार से थे इस वजह से मैंने इस परीक्षा के लिए कोई कोचिंग नहीं लगाई , इस वजह से मैंने इस परीक्षा की प्रिपरेशन घर पर ही|जैसे ही मैंने हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण की| तब से ही मैं इस परीक्षा की तैयारी करने लग गया था| परीक्षा की तैयारी करने के लिए मेरे पास किताबें नहीं थी किताबें खरीदने के लिए मेरे पास पैसे तक नहीं थे| तब मैंने, पास की एक फ्री वाली लाइब्रेरी ज्वाइन की वहां मुझे SSC परीक्षा से संबंधित सभी प्रकार की पुस्तकें मिल गई|

साथ में मेरा  ग्रेजुएशन भी चल रहा था और मैं ssc की भी तैयारी कर रहा था| मैं लगभग 6 घंटे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई करता था| कई बार तो दोस्तों मेरी जिंदगी में ऐसा समय आया कि मेरे पास खाने तक के पैसे नहीं रहते थे| पर उस मुश्किल वक्त में मैंने   उम्मीद नहीं छोड़ी और मैं पढ़ता रहा अपने पूर्ण विश्वास से| और मेरे पिता ने मुझे हौसला दिया वह मुझे हमेशा प्रेरित करते हैं| उनकी प्रेरणा उसे मैं हमेशा प्रेरित होता और जमकर मेहनत करने लगता| मेरी ग्रेजुएशन खत्म होने को थी| जैसे ही मेरी ग्रेजुएशन खत्म हुई  तब मैंने ss cgl एग्जाम दी और उस में पास हो गया| और मेरी जॉब लग गई बस इतनी सी थी मेरी कहानी|

 

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